नीली रोशनी को फिल्टर करने वाले चश्में से आंखों को तनाव से राहत नहीं मिलती
(India) आजकल लोग अपना अधिकांश समय लैपटाॅप, टीवी या फोन पर बिताते है. इस स्क्रीन से हमारे आंखों पर बुरा असर पड़ता है. इससे निकलने वाले रेडिएशंस हमारी आंखों को द्यातक करते है और हमारी आंखों में दर्द, आंखों के नीचे काले घेरे पड़ने लगते है. जब हम किसी चीज़ पर पास से फोकस करते है तो सिलिअरी मसल्स सिकुड़ जाती है और इससे लेंस का शेप ज्यादा गोलाकार हो जाता है. सिंपल शब्दों में जब सिलिअरी मसल्स पर ज्यादा जोर पड़ता है तो यह मसल्स फैलने लगती है और लैंस को वापस फ्लैट आकार देने में आंख की क्षमता कमजोर हो जाती है. इस वजह से आंखों की पुतलियां भी बढ़ने लगती है और दूर की चीजें़ हमें धुंधली दिखाई देती है. आंखों में होने वाले इस तनाव से बचने के लिए नीली रोशनी को फिल्टर करने वाले चश्मों की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ी है. लेकिन रिसर्च के आधार पर एक्स्पर्टस का कहना है कि नीली रोशनी का हमारे आंखों की समस्या से कोई मतलब है ही नहीं.एक्स्पर्टस का कहना है कि इस नीली रोशनी वाले चश्मे से आंखों को तनाव से राहत नहीं मिलती है.

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