महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेटियों को एक दिन के लिए जिलाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना है। इससे बेटियों को प्रशासनिक कार्यप्रणाली समझने और भविष्य में जिम्मेदार पदों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, अलीगढ़, भदोही, प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, उन्नाव और इटावा समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में रैलियां, पदयात्राएं, प्रभात फेरियां और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि, पुलिसकर्मी, छात्राएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भाग ले रही हैं। अभियान के शुरुआती दिनों में रैलियों और पैदल मार्च में 50 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। इसके साथ उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया जा रहा है। मेले, प्रदर्शनी स्टॉल और लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी महिला सशक्तीकरण का संदेश पहुंचाया जा रहा है।
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत महिला कल्याण विभाग 15 प्रमुख गतिविधियों पर काम कर रहा है। इनमें जनजागरूकता रैलियां, महिला सम्मान समारोह, बालिका नेतृत्व विकास, करियर काउंसलिंग और मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से संबंधित कार्यशालाएं शामिल हैं।
साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाल सुरक्षा, पॉक्सो अधिनियम तथा बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की पहचान और उसकी सूचना देने संबंधी प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
कार्यस्थलों पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम के लिए पॉश अधिनियम-2013 के प्रति जागरूकता, विधिक साक्षरता शिविर और लोक अदालत से मिलने वाली सहायता की जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा वृद्धजन आवासों और आश्रय गृहों में संवेदीकरण, कन्या जन्मोत्सव, नवजात शिशु किट और पोषण वितरण, किशोरी स्वास्थ्य, माहवारी स्वच्छता तथा सेनेटरी पैड वितरण जैसी गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा हैं। बाल विवाह और दहेज उन्मूलन के लिए शपथ एवं जनसंवाद और महिला नेतृत्व में यातायात सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
महिला कल्याण विभाग की टीमें गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में जनसंपर्क कर महिलाओं तथा उनके परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और पति की मृत्यु के उपरांत निराश्रित महिला पेंशन योजना शामिल हैं। इसका उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़कर सरकारी सहायता का लाभ दिलाना है।
विभाग के अनुसार, बेसिक शिक्षा विभाग की वित्तीय साक्षरता गतिविधियों से अब तक **1,18,657 बालिकाएं** जुड़ चुकी हैं। इन गतिविधियों के जरिए बालिकाओं में आर्थिक समझ विकसित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। करियर मार्गदर्शन, विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मिशन शक्ति के छठवें चरण में जरूरतमंद महिलाओं को महिला शरणालय, शक्ति सदन, सखी निवास, नारी संरक्षण गृह और अन्य आश्रय सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और सहायता सेवाओं तक पहुंचने में मदद करना है। आपातकालीन हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार के जरिए भी संकट के समय उपलब्ध सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सरकार मिशन शक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर दे रही है। संबंधित अधिकारियों को अभियान में प्राथमिकता के आधार पर सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Author: Liza Chandel
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