30 अगस्त को अल्पसंख्यक नेताओं ने मुजफ्फरनगर में एक पंचायत की थी. पंचायत में इन नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए थे. जिसके बाद सरकार ने इनके खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर लिया गया. कई नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकले, कई गिरफ्तार हुए और कई नेता तो जेल में भी रहकर आ चुके हैं. दंगो पर भाजपा का कहना था कि इन नेताओं के भाषण की वजह से मुजफ्फरनगर में दंगे फैले थे. इस चिट्ठी में सरकार की तरफ से पूछा गया है कि क्या 30 अगस्त को खालापार में हुई पंचायत में जिन नेताओं पर केस दर्ज हुए क्या वह वापस लिये जा सकते हैं.
जिन नेताओं पर उकसाने वाला भाषण देने का आरोप है उनमें बीएसपी सांसद कादिर राना, उनके भाई और बीएसपी विधायक नूर सलीम राना, विधायक मौलाना जमील, पूर्व गृह राज्यमंत्री सईदुज्जमा समेत कई नेता शामिल हैं. इन सभी नेताओं पर पुलिस ने धारा 144 तोड़ने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया था.
इस मामले में कानूनी जानकारों का मानना है कि अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ दंगे का केस वापस लेने की अखिलेश सरकार की कोशिश पर कानून के जानकार कह रहे हैं कि जब जांच चल रही है तब केस वापस लेने की ये कोशिश सिर्फ एक खास समुदाय को खुश करने के लिए है.
गौरतलब है कि दो संप्रदायों द्वारा मुजफ्फरनगर में पंचायत आयोजित करके एक दूसरे के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए गए थे. जिसके बाद पूरा मुजफ्फरनगर दंगों की आग में झुलस उठा दंगों में तकरीबन 40 लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल हो गए थे। दंगों के बाद 50,000 लोगों को बेघर होकर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी.
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।