सांस्कृतिक हृास और सामाजिक बिखराव से मिला दुराचार को बढ़ावा: उमा
(DELHI, India) उमा ने रविवार रात बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय सभागार में दो किताबों का विमोचन करने के बाद कहा कि देश में सांस्कृतिक मूल्यों के हृास और सामाजिक बिखराव के कारण ही दुराचार को बढ़ावा मिला है और अपनी सांस्कृतिक विरासत के मूल्य ही इस बुराई को दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत माता-पिता के संस्कारों से प्रेरित लोगों का संस्कारवान देश है। सबसे खास बात यह है कि भारतीय संस्कृति की अनिवार्यताएं किसी भी कानून से सख्त हैं। ऐसे में हम मात्र सामाजिक बल पर किसी भी कुरीति को खत्म कर सकते हैं। रवीन्द्र शुक्ल लिखित पुस्तकों ‘शत्रुघ्न चरित्र’ और ‘वर्ण व्यवस्था की मौलिक अवधारणा एवं विकृति’ का विमोचन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने हमारी वर्ण व्यवस्था की आड़ में धार्मिक साहित्य पर हमला किया है जो देशहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य हमारे जीवन में रस घोलते हैं और सशक्त सामाजिक व्यवस्था ने ही हमारे देश को सम्भाल रखा है। उमा ने यह भी कहा कि भारतीय मान्यताओं में थोड़े से बदलाव ने ही गंगा नदी को मैला कर दिया है।

Author: JAN TV Editorial Team

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