(India)
उन्होंने यहां स्कूली बच्चों के साथ बातचीत में कहा, एक पारी जिसने मेरा करियर बदला या मेरे करियर को दिशा दी वह पर्थ में 1992 की पारी थी। पर्थ को तब सबसे तेज विकेट माना जाता था और ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज इतने खतरनाक थे कि उनसे पार पाना मुश्किल था। तब मैं शतक जड़ने में सफल रहा और उस समय मैं केवल 19 साल का था। तेंदुलकर ने कहा, और इससे केवल दो मैच पहले मैंने सिडनी में शतक लगाया था लेकिन वे दोनों अलग अलग तरह की पिचें थी। मैं जानता था कि पर्थ का विकेट ऐसा है जैसा मुझे दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगा और यदि मैं पर्थ में बल्लेबाजी करके रन बना सकता हूं तो फिर मैं किसी भी पिच पर रन बनाने में सफल रहूंगा। उन्होंने कहा, तब मेरे करियर की शुरूआत ही हुई थी। मैंने पिछले दो साल से अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन पर्थ की पारी के बाद मेरा करियर बदल गया क्योंकि मुझे महसूस हुआ कि मैं दुनिया का सामना करने के लिये तैयार हूं। मैं अति आत्मविश्वास में नहीं था लेकिन मेरा खुद पर विश्वास बढ़ गया और मैं किसी भी चुनौती का सामना करने के लिये तैयार था।
Author: JAN TV Editorial Team
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