महिलाओं की पारंपरिक 60 किग्रा MMA स्पर्धा के सेमीफाइनल में सुचिका का मुकाबला सिंगापुर की टेओ हुई हून से हुआ। मुकाबला बेहद कड़ा रहा और निर्धारित समय के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कोई स्पष्ट विजेता नहीं निकल सका।
शुरुआत में मुकाबले का फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी टेओ हुई हून के पक्ष में दिया गया। इसके बाद भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चुनौती के बाद मुकाबले की समीक्षा की गई और परिणाम को ड्रॉ घोषित किया गया।
ड्रॉ के बाद विजेता तय करने के लिए खिलाड़ियों के वजन का नियम लागू किया गया। इस नियम के तहत जिस खिलाड़ी का वजन कम होता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है। सुचिका अपनी प्रतिद्वंद्वी से करीब 700 ग्राम अधिक भारी थीं। इसी वजह से फैसला सिंगापुर की टेओ हुई हून के पक्ष में चला गया और सुचिका फाइनल में जगह नहीं बना सकीं।
फाइनल में नहीं पहुंच पाने के बाद सुचिका भावुक हो गईं और उनकी आंखों में निराशा साफ दिखाई दी। हालांकि, सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही उन्होंने भारत के लिए पदक पक्का कर लिया था।
MMA को पहली बार एशियन गेम्स में शामिल किया गया और सुचिका ने इस खेल में भारत को पहला पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिलाओं की पारंपरिक 60 किग्रा स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। यह एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का पहला MMA पदक है।
फाइनल में जगह बनाने से चूकने के बावजूद सुचिका का यह प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में दर्ज हो गया है।
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