सांप्रदायिक हिंसा बिल पर चर्चा को लेकर राहुल गांधी का लोकसभा में हंगामा,
(DELHI, India) विपक्ष ने लोकसभा में सांप्रदायिक हिंसा बिल पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा करने की मांग की। इस मांग को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा में स्पीकर के वेल में पहुंच गए और हंगामा करने लगे। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार नहीं चाहती है कि बिल पर चर्चा हो, सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाता है। सिर्फ एक व्यक्ति की सुनी जाती है। उधर बीजेपी का कहना है कि राहुल का व्यवहार अमर्यादित है। राहुल गांधी ने कहा कि, हम इस मुद्दे पर बहस की मांग करते हैं, लेकिन हमें इसकी अनुमति नहीं दी जा रही। उनकी पार्टी और अन्य पार्टियों का मानना है कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जाता। केवल एक ही व्यक्ति को बोलने का अधिकार है। लोकसभा स्पीकर भेदभाव करती हैं और हम इस भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार ने मन बना लिया है कि संसद में किसी तरह की बहस ना हो।
क्या है सांप्रदायिक हिंसा बिल
सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक भारत का एक बिल है, इस बिल का प्रारूप यूपीए की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के द्वारा तैयार किया गया है। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने 14 जुलाई 2010 को सांप्रदायिकता विरोधी बिल का खाका तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति का गठन किया था। इस बिल की सबसे अधिक विवादस्पद बात यह है कि इस बिल में यह बात पहले से ही मान ली गई है की हिंसक केवल बहुसंख्यक होते हैं। अल्पसंख्यक नहीं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मेरठ में खरखौदा इलाके में मदरसे में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और धर्म परिवर्तन संबंधी शपथ पत्र पर उससे जबरन हस्ताक्षर करवाए गए। उसके बाद से इलाके में तनाव पैदा हो गया। इससे पहले सहारनपुर और मुजफ्फरनर में दो समुदायों के बीच दंगे हुए थे। उधर, युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक दुराचार और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए भाजपा ने सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सत्यवीर त्यागी, विनीत अग्रवाल शारदा के साथ पीड़ित युवती के गांव सरावा पहुंचे। यहां उन्होंने पीड़ित परिवार से घटना के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्हें न्याय दिलवाने का आश्वासन दिया।

Author: JAN TV Editorial Team

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