सांप्रदायिक हिंसा बिल पर कांग्रेस के हंगामे के बाद सरकार चर्चा कराने को तैयार
(DELHI, India) देश में कथित रूप से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए लोकसभा में चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस, राजद, सपा और कई अन्य दलों के सदस्यों ने आज भारी हंगामा किया,,,उधर संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू ने देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में वृद्धि के विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में शांति है और जनता खुश है। उन्होंने सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा, सरकार इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। आप इतने अनुभवी हैं। आप लोगों ने इतने साल सरकार चलायी है। सदन में किसी विषय को उठाने की एक पद्धति है। आप किसी नियम के तहत नोटिस दें। नायडू ने कहा, लेकिन विपक्ष ने जो आरोप लगाया है उसकी मैं निंदा करता हूं और इन बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह खारिज करता हूं। आप हताश हैं। देश में शांति है सदन में भी शांति होनी चाहिए। इससे पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी खड़गे से कहा कि अगर कहीं कुछ विशेष हुआ हो तो बताइए। सारे देश की बात मत करिए। खड़गे जी कहां दंगा हुआ है, जगह बताइए। खड़गे ने कहा कि क्या बात है कि इस सरकार के आते ही हर जगह दंगे फैल रहे हैं। देश में बहुत जगह दंगे हो रहे हैं। इसमें किसका हाथ है ? कौन ये दंगे फैला रहा है ? इस पर चर्चा होनी चाहिए। उनकी इस बात का भाजपा सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष ने अगर इस पर नोटिस दिया है तो अगली कार्य मंत्रणा समिति में इस विषय को लिया जा सकता है। मंत्री ने भी चर्चा से इंकार नहीं किया है। इस पर खड़गे ने कहा कि कार्य स्थगन प्रस्ताव का जो नोटिस दिया है उसे नियम 193 में तब्दील कर सकते हैं। 193 का नोटिस पहले ही है। आसन चर्चा का समय तय करे। उन्होंने कहा कि जब ध्यानाकषर्ण प्रस्ताव को 193 में तब्दील कर सकते हैं तो कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को क्यों नहीं कर सकते ? उन्होंने आसन से कहा कि इस प्रकार का भेदभाव मत करिए। यह अन्याय है। उनके इतना कहते ही कांग्रेस, राजद, आप और सपा सदस्य आसन के समक्ष आकर भेदभाव का आरोप लगाते हुए नारे लगाने लगे। इस पूरे हंगामे के कारण कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी सदस्य राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा दीपेन्द्र सिंह हुड्डा के साथ गहन विचार विमर्श करती दिखीं। अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही अन्य सदस्यों को शून्यकाल के अपने मसले उठाने का मौका दिया।

Author: JAN TV Editorial Team

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