मनमोहन सिंह ने कहा, उनका (संजय) बहुत प्रभाव था। उनके सीधे हितों से जुड़ी चीजों को संभाल रहे कई लोगों का मानना था कि वे काफी दबाव महसूस करते थे। दमन सिंह की पुस्तक के अनुसार आपातकाल के बाद मोरारजी देसाई की अगुवाई में जनता पार्टी की सरकार बनी तो कई अधिकारियों को ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन सिंह को उनके स्थान पर बरकरार रखा गया। मनमोहन सिंह ने शुरूआत में महसूस किया कि देसाई उनके प्रति ज्यादा लगाव नहीं रखते थे। इस पुस्तक में मनमोहन सिंह को उद्धृत करते हुए कहा गया है, जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्हें बताया गया कि मैं पिछली सरकार के काफी करीब था। इसलिए शुरूआत में वह काफी कठोरता से पेश आए। परंतु कुछ समय के बाद उनका मुझसे लगाव हो गया। मोरारजी देसाई निष्पक्ष रूप से संतुलित थे, हालांकि लोगों ने उन्हें एक कठोर व्यक्ति के तौर पर गलत ढंग से समझ लिया। मेरा मानना है कि वह सतही स्तर पर काफी कठोर थे लेकिन एक जिम्मेदार व्यक्ति भी थे। पुस्तक के मुताबिक मनमोहन सिंह का कहना है कि उन्हें 1991 में पीसी अलेकजेंडर ने जब पी वी नरसिम्हा राव की ओर से वित्त मंत्री बनने का प्रस्ताव देने के लिए फोन किया तो वह सो रहे थे और यह उनके लिए अप्रत्याशित था। मनमोहन सिंह के अनुसार राव की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका यह रही कि उन्होंने उन्हें उदारीकरण की प्रक्रिया की इजाजत दी तथा अपना पूरा सहयोग दिया। पूर्व प्रधानमंत्री का कहना है कि राव उदारीकरण को लेकर पहले थोड़ा संशय में थे, लेकिन उन्होंने उनको मनाया।
Author: JAN TV Editorial Team
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