इस अदालत के अधिकारक्षेत्र के मुद्दे पर पीठ को संतुष्ट करने के लिए अधिवक्ता ने कहा था कि कार्रवाई का कारण आंशिक रूप से दिल्ली में बनता है क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और शहरी विकास मंत्रालय जैसे कार्यालय और संवैधानिक इकाइयां यहां मौजूद हैं । शर्मा ने अदालत से कहा था कि वह पहले ही सीबीआई को अभिवेदन दे चुके हैं, लेकिन न तो उसने प्राथमिकी दर्ज की और न ही मामले में प्रारंभिक जांच दर्ज की ‘जो 2005 से 2012 तक की अवधि के दौरान सरकारी खजाने को पहुंचे भारी नुकसान से संबधित है ।’ उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रति भी सौंपी थी जिसमें पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि आरोप संज्ञेय अपराध होने का खुलासा करता है तो वे ‘आवश्यक तौर पर’ प्राथमिकी दर्ज करें । याचिका में यह भी मांग की गई थी कि वाड्रा की कंपनियों द्वारा गुड़गांव में खरीदी गयी कृषि जमीन के भू इस्तेमाल को बदलने के लिए लाइसेंस प्रदान किए जाने की भी जांच की जाए
Digital Desk: Shiv Kishor
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