आज है  "एम. एफ. हुसैन" का जन्मदिन
(India) मकबूल ने शुरूआती पढ़ाई इंदौर से की, फिर आगे की पढ़ाई के लिए दुबारा मुंबई वापस आ गए। 1935 में उन्होंने जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया। शुरूआत के दिनों में हुसैन ने फिल्मों के बैनर, पोस्टर और होडिंग बनाकर चित्रकारी की दुनिया में कदम रखा। 1940 के बाद से उनके काम को मान्यता और प्रसिद्धि मिलनी शुरू हो गई। 1947 में उन्होंने प्रोगेसिव आर्ट ग्रूप में सदस्यता ले ली जिससे उनके कॅरियर को नई दिशा मिली। धीरे धीरे ही सही हुसैन कामयाबी की सीढिया चढ़ते रहे। 1952 में ज्युरिख में उनके चित्रों की पहली प्रदर्शनी लगी जिसे काफी सराहा गया। 1955 में कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया गया। 1967 में उनकी बनाई गई पहली फिल्म थ्रू द आइस ऑफ ए पेंटर को बर्लिन फिल्म महोत्सव में गोल्डन बीयर का सम्मान दिया गया। 1973 मे उन्हें पद्यभूषण और 1991 में पद्य विभूषण के पुरस्कार ने नवाजा गया। हुसैन ने माधुरी दीक्षित की खूबसूरती से प्रेरित होकर गजगामिनी बनाई तो तब्बू की सुंदरता देख कर मीनाक्षी जैसी बेहद सफल फिल्में बनाई। हुसैन एक बेहतरीन चित्रकार होते हुए भी विवादों से घिरे रहे और बाद में हिंदू देवी देवताओं के अश्लील चित्र बनाने की वजह से देश भर में उनकी काफी निंदा हुई जिसकी वजह से उन्हें भारत की नागरिकता छोड़नी पड़ी। भारत से जाने के बाद हुसैन ने काफी समय लंदन में गुजारा। 9 जून 2011 में 95 वर्ष की उम्र में लंग कैंसर के कारण भारतीय पिकासो मकबूल फिदा हसैन को निधन हो गया।
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