टर्मिनल में प्रवेश करते ही यात्रियों का स्वागत ‘जागृति’ नामक विशाल कलाकृति से होगा। करीब 100 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी यह एक्रेलिक-ऑन-कैनवस रचना भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा को दर्शाती है। छह पैनलों में विभाजित यह कलाकृति देश के ऐतिहासिक शहरों, पवित्र स्थलों और भारतीय दर्शन की झलक प्रस्तुत करती है।
एयरपोर्ट की दूसरी प्रमुख कलाकृति ‘द मिस्टिक अबोड’ है, जिसे 8,500 से अधिक पीतल की घंटियों से तैयार किया गया है। घर के आकार की यह संरचना शांति, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जा रही है। कलाकार के अनुसार, इसका उद्देश्य यात्रियों को व्यस्त जीवन के बीच कुछ पल सुकून और आत्मिक शांति का अनुभव कराना है।
पदमश्री सम्मानित परेश मैती अपनी सार्वजनिक कला परियोजनाओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनकी चर्चित कृतियों में Indira Gandhi International Airport के टर्मिनल-3 पर स्थापित ‘द इंडियन ओडिसी’ और टर्मिनल-1 की ‘साउंड ऑफ साइलेंस’ शामिल हैं।
परेश मैती ने बताया कि Varanasi उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रही है। पिछले चार दशकों से वह काशी के घाटों का दौरा करते रहे हैं और हर यात्रा ने उन्हें कला के नए आयाम दिए हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के खुलने के साथ ही ये कलाकृतियां देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को केवल एक आधुनिक टर्मिनल ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और कलात्मक पहचान का भी अनुभव कराएंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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