(DELHI, India)
ये एक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि नए इंफ्रास्ट्रक्चर औऱ स्मार्ट सिटी के साथ ही कॉरिडोर बनाना। निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘मेक इंडिया’ सिर्फ एक शुरुआत है। डी-लाइसेंसिस, डी-रेगुलाइजेशन की शुरुआत है। हम भारत को ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग का स्थान बनाने का सपना देखते हैं। मैनुफैक्चरिंग अभी सिर्फ 15 प्रतिशत है। जिसे हम 25 प्रतिशत करना चाहते हैं। ये एक शुरुआत है औऱ इसे हम जारी रखेंगे तब तक जब तक कि हम अपने मिशन को पूरा नहीं कर लेते। सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियां भारत आएं और यहां निर्माण करें। बेशक वो अपने उत्पाद कहीं भी बेचने को स्वतंत्र हैं। इससे ना सिर्फ देश में पैसा आएगा बल्कि रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के नियमों में बदलाव किया और इसे काफी उदार बनाया। इस कार्यक्रम में पीएम के अलावा केंद्र सरकार के आठ वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए। देश-विदेश के तमाम बड़े उद्योगपति भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विज्ञान भवन पहुंचे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी, टाटा समूह के साइरस मिस्त्री, विप्रो के अजीम प्रेमजी, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला, चंदा कोचर, किरण मजूमदार शॉ समेत तमाम बड़े उद्योगपति इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सरकार भारत में निवेशकों की सुगमता के लिए सभी प्रयास कर रही है। इसमें व्यावसायिक इकाइयों की पूछताछ आदि का 72 घंटे में जवाब देने के लिए एक प्रकोष्ठ का गठन भी शामिल है। यह सभी नियामकीय प्रक्रियाओं की निगरानी भी करेगा और उन्हें सरल बनाएगा। इसके साथ अनुपालन के बोझ को भी कम किया जाएगा। केंद्र सरकार ने ऐसे 25 महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें भारत दुनिया में अग्रणी स्थिति हासिल करने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक सामान्य परिचय पुस्तिका के अलावा उपरोक्त महत्पूर्ण चिह्नित क्षेत्रों के बारे में अलग-अलग ब्रोशर भी जारी किए। जिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के अलग-अलग ब्रोशर जारी किए गए उनमें वाहन, रसायन, आईटी, फार्मा, परिधान, बंदरगाह, विमानन, चमड़ा, पर्यटन एवं आतिथ्य, वेलनेस व रेलवे शामिल हैं।
Digital Desk: Shiv Kishor
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