(India)
खेलों की आयोजन समिति के उप महासचिव चियो ताइक सोन ने आज सुबह संवाददाताओं से कहा कि भारतीय मुक्केबाज एल सरिता देवी का पदक स्वीकार करने से इनकार करना खेदजनक और खेल भावना के खिलाफ है। यह मामला एशियाई ओलंपिक परिषद के कार्यसमूह के पास भेज दिया गया है जो अब इस मुद्दे पर फैसला करेगा। लाइटवेट महिला मुक्केबाज सरिता ने 30 सितंबर को अपने सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया की विरोधी जिना पार्क पर दबदबा बनाया हुआ था लेकिन जजों के खराब फैसले के बाद उन्हें हारा हुआ करार दिया गया और वह स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह नहीं बना सकी। उन्होंने पदक वितरण समारोह के दौरान अधिकारियों को पदक गले में नहीं पहनाने दिया। सरिता ने हाथ में पदक स्वीकार करने के बाद इसे रजत पदक विजेता पार्क के गले में लपेट दिया और बिना पदक के ही चली गई। कोरियाई खिलाड़ी ने भी बाद में पदक को वहीं छोड़ दिया। सोन ने कहा कि ओसीए का कार्यसमूह इस मामले पर फैसला करेगा और यह खिलाड़ी पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि यह काफी खेदजनक है कि ऐसा हुआ और यह एशियाई एकजुटता के लक्ष्य के खिलाफ है जो हमने खेलों से पहले अपने लिए तय किया था। यह साथ ही खेल भावना के खिलाफ है और यह हरकत अन्य खिलाड़ियों के अपमान को भी दर्शाती है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। सोन ने कहा कि हमने सुनिश्चित किया है कि इन खेलों में घरेलू फायदे जैसी कुछ चीज नहीं हो। दर्शकों को मुक्केबाज के चेहरे पर खून दिख सकता है लेकिन यह मुक्के पर स्कोर देने के जजों की गणना से अलग हो सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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