काला धन: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को आदेश, 'कल तक सभी खाताधारकों के नाम बताएं'
(DELHI, India) इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को कोर्ट में हलफनामा दायर कर तीन खाताधारकों के नाम बताए थे। सभी खाताधारकों के नामों की एसआईटी जांच करेगा। कोर्ट ने कहा कि हम अपना आज का आदेश नहीं बदलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले खाता धारकों के नामों के खुलासे से संबंधित न्यायिक आदेश में संशोधन का अनुरोध करने के लिए एनडीए सरकार को आड़े हाथ लिया। कोर्ट ने केन्द्र से कहा, हम अपने आदेश में एक शब्द भी नहीं बदलेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि विदेशी बैंकों में सारे खाता धारकों के नाम कल तक उसके सामने पेश किए जाएं। कोर्ट का कहना है केंद्र में सत्तारूढ नई सरकार अब आदेश में सुधार का अनुरोध नहीं कर सकती क्योंकि वह तो खुली अदालत में पारित किया गया था और सरकार ने इसे स्वीकार किया था। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आप विदेशी बैंकों में खाता धारकों को संरक्षण क्यों प्रदान कर रहे हैं? हम कालाधन वापस लाने का मसला सरकार पर नहीं छोड़ सकते। हमारे समय के दौरान ऐसा कभी नहीं होगा। गौर हो कि केंद्र सरकार ने सोमवार को विदेशों में काला धन जमा करने वाले डाबर समूह के एक प्रवर्तक प्रदीप बर्मन सहित दो प्रमुख व्यवसायियों तथा गोवा की एक खनिज कंपनी और उसके पांच निदेशकों के नामों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी थी। कोर्ट में दाखिल 16 पेज के केंद्र के हलफनामे में राजकोट स्थित सर्राफा कारोबारी पंकज चिमनलाल लोढ़ीया और गोवा की कंपनी टिंब्लो प्रा लि तथा उसके पांच निदेशकों श्रीमती राधा एस टिंब्लो, चेतन टिंब्लो, रोहन टिंब्लो, श्रीमती अन्ना टिंब्लो और श्रीमती मल्लिका टिंब्लो के नामों का उल्लेख है। फ्रांस सरकार से मिली सूचना के आधार पर बर्मन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की गई थी जबकि अन्य के मामले दूसरे देशों से मिली सूचना पर आधारित हैं जिनके नामों का जिक्र वित्त मंत्रालय के हलफनामे में नहीं था। इन नामों का खुलासा करने के प्रति टालमटोल रवैया अपनाने के आरोप के साथ राजनीतिक प्रतिद्वन्द्वियों का निशाना बन रही सरकार ने इस हलफनामे में काला धन जमा करने वाले उन व्यक्तियों के नामों का और खुलासा करने का वायदा किया है जो उसकी जांच के दायरे में आए हैं लेकिन साथ ही उसने कहा है कि विदेशी बैंकों में सभी खातों को गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता है।

Digital Desk: Shiv Kishor

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