दिल्ली में कोई भी पार्टी सरकार बनाने को तैयार नहीं, LG नजीब जंग ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की
(DELHI, India) राष्ट्रपति को भेजी गई रिपोर्ट में जंग ने कहा है कि दिल्ली में कोई भी पार्टी सरकार बनाने को तैयार नहीं है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की है। दरअसल, सोमवार को बीजेपी ने उपराज्यपाल से कह दिया है कि वह राज्य में सरकार नहीं बनाएगी। यानी अब दिल्ली में फिर से चुनाव का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। अब सिर्फ औपचारिक तौर पर चुनावी तारीखों का ऐलान होना बाकी रह गया है। गौर हो कि भाजपा ने सरकार बनाने के लिए उपराज्यपाल के आमंत्रण को नकार दिया, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे तत्काल चुनाव कराये जाने के पक्ष में हैं। भाजपा के सतीश उपाध्याय और जगदीश मुखी, कांग्रेस के हारून यूसुफ और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल एवं मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल से मुलाकात की। उपराज्यपाल निवास की एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘उपरोक्त सभी दलों ने सरकार बनाने के प्रति अपनी असमर्थता जताई है। उपराज्यपाल नजीब जंग ने उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें दिल्ली में सरकार के गठन की संभावना तलाशने के लिए 11 नवम्बर तक का समय दिये जाने के मद्देनजर राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श किया। उच्चतम न्यायालय दिल्ली विधानसभा को जल्द से जल्द भंग किये जाने की मांग संबंधी आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार के इस्तीफे के बाद से दिल्ली विधानसभा निलंबित है और यहां राष्ट्रपति शासन लागू है। फिलहाल सहयोगी अकाली दल के एक सदस्य के साथ भाजपा के 29 विधायक हैं और उसे बहुमत साबित करने के लिए पांच और विधायकों के समर्थन की जरूरत होती क्योंकि भाजपा के तीन विधायकों के लोकसभा के लिए चुन लिये जाने के कारण विधानसभा के सदस्यों की संख्या अभी 67 है। दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए पिछले साल दिसंबर में हुये चुनाव में भाजपा 31 सदस्यों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और उसे अकाली दल के एक सदस्य का समर्थन प्राप्त था। तब बहुमत से चार सीटें कम होने के कारण भाजपा ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया था और कहा था कि वह सत्ता हासिल करने के लिए कोई ‘अनुचित रास्ता’ नहीं अपनायेगी। इसके बाद 28 सदस्यों वाली आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के आठ सदस्यों के समर्थन से सरकार का गठन किया था। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार ने 14 फरवरी को उस समय इस्तीफा दे दिया जब भाजपा और कांग्रेस के विरोध के कारण जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो सका। दिल्ली में 17 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।

Digital Desk: Shiv Kishor

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।