(DELHI, India)
देश के विभिन्न हिस्सों में 8 से 14 दिसंबर तक सप्ताहभर चलने वाले प्रदर्शनों के लिए केंद्र में चार वाम दलों से भाकपा (माले)-लिबरेशन और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया जैसे नए साथियों के मिलने के साथ ही पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे प्रांतों में कई अन्य दल और समूह भी हाल में जुड़े हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि वाम दल राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए धीरे-धीरे एकजुट हो रहे हैं जैसा हाल में बिहार में देखा गया जहां माकपा और भाकपा ने भाकपा (माले)-लिबरेशन से गठजोड़ किया। दिसंबर के प्रदर्शनों में श्रम कानूनों को ‘हल्का बनाए जाने’ के सरकारी कदम, महंगाई, आवश्यक दवाओं के दामों में ‘बेतहाशा बढ़ोतरी’, बीमा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाए जाने और काले धन जैसे मुद्दे शामिल होंगे। सांप्रदायिकता में इजाफा, तथाकथित ‘लव जिहाद’ घृणा अभियान और सांप्रदायिक प्रचार के अन्य रूप, महिलाओं, दलितों और दबे कुचले तबकों पर अत्याचार जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल होंगे। माकपा राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना को कथित रूप से ‘हल्का करने’ के सरकार के कदम के खिलाफ 26 नवंबर को यहां धरना देगी जिसका नेतृत्व त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार करेंगे। माकपा ने कहा है कि सरकार अपने आधिकारिक आंकड़ों में खुद मान चुकी है कि मनरेगा के कार्यान्वयन के मामले में त्रिपुरा सर्वश्रेष्ठ राज्य है, लेकिन मोदी सरकार ने इसके आवंटन में ‘मनमाने ढंग से और जबरदस्त’ कटौती कर दी गई। इसने कहा कि कोष की कमी की वजह से कार्य दिवसों की संख्या पहले ही कम हो गई है जिससे इसका लाभ उठा रहे हजारों रोजगार पत्र धारकों, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के लोगों और ग्रामीण गरीबों के अन्य तबकों की आजीविका और पारिवारिक आय पर सीधा असर पड़ रहा है
Digital Desk: Shiv Kishor
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