(DELHI, India)
मुंबई आतंकी हमलों के 166 मृतकों और सैंकड़ों घायलों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, हम गंवाई जा चुकी जिंदगीयों की अनंत पीड़ा महसूस करते हैं। आइए आतंकवाद और अंतरदेशीय अपराधों से निपटने के लिए हमने जो संकल्प किए उन्हें पूरा करने के लिए हम सब मिलकर काम करें। शिखर सम्मेलन में अपने लगभग 30 मिनट के संबोधन में मोदी ने अफगानिस्तान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों के इन विचारों का समर्थन किया कि आतंकवाद का खतरा क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की मूलभूत चुनौती है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि मई 2009 में श्रीलंका में आतंकी समूहों को निष्क्रिय करने से क्षेत्र का माहौल व्यापक स्तर पर बदल गया।मोदी ने कहा, लेकिन मुझे हमारी असीम क्षमताओं में बड़ा भरोसा और विश्वास है-यह भरोसा हमारे अपने देशों में नवोन्मेष और नयी पहल की विभिन्न प्रेरक कहानियों से आता है। उन्होंने कहा, यद्यपि दक्षेस 30 साल पहले गठित हुआ था, लेकिन जब हम दक्षेस की बात करते हैं तो हम आम तौर पर निराशावादी और संशयवादी दो तरह की प्रतिक्रियाएं सुनने को मिलती है। प्रधानमंत्री ने दक्षेस नेताओं से कहा, हमें निराशावाद को आशावाद में बदलने के लिए काम करना चाहिए। हमें दक्षिण एशिया को शांति एवं संपन्नता के समृद्ध क्षेत्र में परिवर्तित करने की उम्मीद को कुसुमित करने के लिए काम करना चाहिए। मोदी ने अफसोस जताया कि दक्षेस देशों के बीच का आपसी व्यापार इस क्षेत्र के वैश्विक व्यापार का पांच प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा, अभी आपस में जो व्यापार हो रहा है उसका 10 प्रतिशत से कम दक्षेस मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था के अंतर्गत होता है। मोदी ने उल्लेख किया कि भारतीय कंपनियां विदेशों में अरबों का निवेश कर रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र के देशों में उनका निवेश एक प्रतिशत से भी कम है।
Digital Desk: Shiv Kishor
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