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बॉलीवुड में अपनी मधुर संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले महान संगीतकार आर.डी.बर्मन भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन फिजा के कण-कण में उनकी आवाज गूंजती हुई महसूस होती है, जिसे सुनकर श्रोताओं के दिल से बस एक ही आवाज निकलती है "चुरा लिया है तुमने जो दिल को"। आरडी बर्मन को हमने आज ही के दिन साल 1994 में खो दिया था। इनका का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता एस.डी.बर्मन बॉलीवुड के जाने माने फिल्मी संगीतकार थे। घर में फिल्मी माहौल के कारण उनका भी रूझान संगीत की ओर हो गया और वह अपने पिता से संगीत की शिक्षा लेने लगे। फिल्म जगत में पंचम के नाम से मशहूर आर.डी.बर्मन को यह नाम तब मिला जब उन्होंने अभिनेता अशोक कुमार को संगीत के पांच सुर "सा.रे.गा.मा.पा" गाकर सुनाया। पंचम दा ने अपनी पहली धुन "ए मेरी टोपी पलट के आ" नौ वर्ष की उम्र में बनाया जिसे उनके पिता सचिन देव बर्मन ने अपनी फिल्म "फंटूश" में प्रदर्शित किया। बतौर संगीतकार उन्होंने अपने सिने करियर की शुरूआत महमूद की निर्मित फिल्म "छोटे नवाब" से की लेकिन इस फिल्म के जरिये वह कुछ खास पहचान नहीं बना पाए। एक दिन महमूद आर.डी.बर्मन को अपनी कार मे बिठाकर घुमाने निकल गये। रास्ते में सफर अच्छा बीते इसलिये आर.डी.बर्मन ने अपना माउथ आरगन निकाल लिया और बजाने लगे । उनके धुन बनाने के अंदाज से महमूद इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फिल्म में एस.डी.बर्मन को काम देने का इरादा त्याग कर अपनी फिल्म "छोटे नवाब" में काम आर.डी.बर्मन को करने का मौका दे दिया। उन्होंने अपने चार दशक से भी ज्यादा लंबे सिने करियर करीब 300 हिन्दी फिल्मों के लिये संगीत दिया। हिन्दी फिल्मों के अलावा बंगला, तेलगु, तमिल, उडिया और मराठी फिल्मों में भी अपने संगीत के जादू बिखेरा। आरडी बर्मन ने फिल्मी संगीत के साथ-साथ पंचम दा गैर फिल्मी संगीत से भी श्रोताओं का दिल जीतने में कामयाब रहे। अमरीका के मशहूर संगीतकार जोस फ्लोरेस के साथ उनकी निर्मित एलबम "पंटेरा" काफी लोकप्रिय रही।
Author: JAN TV Editorial Team
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