(DELHI, India)
उन्होंने ‘नमामी गंगे परियोजना’ पर आज एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उक्त सुझावों के साथ कहा कि इस परियोजना को प्रदूषण के स्रोत पर ही नियंत्रण लाने के लिए मुख्यत: दो बातों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मोदी ने कहा कि गंगा को गंदा ना करें। इसके लिए प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए मुख्यत: दो क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। ये हैं: शहरी जलमल और औद्योगिक अपशिष्ट। उन्होंने औद्योगिक अपशिष्ट जल की रीसाइक्लिंग (पुनर्चकरण) पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण रोकने के लिए प्रेरित करना चाहिए और ऐसा नहीं करने वालों के विरूद्ध वर्तमान कानूनों के तहत कार्रवाई करनी होगी। भारत की इस प्रमुख नदी का प्रदूषण सामाप्त करने में मदद के लिए ‘गंगा वाहिनी’ नामक स्वयंसेवियों का नेटवर्क बनाने को भी मंजूरी दी गई। इस नेटवर्क को कामकाजी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसी 118 स्थानीय निकाय इकाइयों की पहचान की गई है जिन्हें पांच साल के भीतर प्रदूषण समाप्त करने के लिए सक्रिय किया जाएगा।
Digital Desk: Shiv Kishor
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।