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जयपुर- जवाहरकला केंद्र में गुरुवार को बनारस घराने की गायकी के रंगों का संगीत प्रेमियों ने लुत्फ उठाया। मौका था कोलकाता के प्रसन्नजीत चक्रवर्ती के गायन का। प्रसन्नजीत ने अपनी गायकी में बनारस घराने की नजाकत और वहां की लय ताल के पक्षों का सुरों की गहराई में डूबकर प्रदर्शन किया। उनके गायन में ध्रुवपद के मींड और गमक अंक के साथ ठुमरी की नजाकत और तानों के कौशल साथ सुरों का बेहतरीन समन्वय सुनने योग्य पक्ष थे। कार्यक्रमका प्रारंभ उन्होंने राग शुद्ध कल्याण में विलंबित एक ताल और द्रुत-तीन ताल की बंदिशों से किया। इनको पेश करने का अंदाज ठेठ बनारसी था। इसके बाद इन्होंने राग छायानट पेश किया। कार्यक्रम का समापन कलाकार ने ठुमरी ‘तोरी-मोरी, मोरी-तोरी ना बनेगी श्याम...’ से किया।
Author: JAN TV Editorial Team
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