अगर बनता है तो कानूनी कार्रवाई का भागी बनेगा. अगर बैन लगा तो कम से कम 5 साल के लिए लगेगा. संगठन कहीं से चंदा भी नहीं ले सकेगा. कोई चंदा दे भी नहीं सकता. हालांकि संसद में सरकार कह चुकी है कि जाकिर के आतंकी कनेक्शन के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन 55 आतंकी जाकिर के भाषणों से प्रेरित रहे हैं. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद से चर्चा में आए जाकिर नाईक पेशे से डॉक्टर है. लेकिन, रोगियों के इलाज में उसका मन नहीं लगा और डॉक्टरी छोड़ कर इस्लाम के प्रचार प्रसार में जुट गया. जिसके बाद उन्होंने इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन बनाया और पूरी दुनिया में इस्लाम और कुरान पर लेक्चर देने लगा. जाकिर को सुनने वालों को संख्या कितनी ज्यादा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2012 में बिहार के किशनगंज में जाकिर की एक सभा हुई. जिसमें, 10 लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया गया. जाकिर मीडिया से भी नाराज रहता है. उसका आरोप है कि मीडिया वाले मुसलमानों की छवि खराब करते हैं.
Digital Desk: Manish Patwa
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