सरकार के मुताबिक इस कानून के पारित होने के बाद निजी क्षेत्र भी कानूनन 26 हफ्तों की छुट्टियां देने को बाध्य होगा. यही नहीं इस कानून के मुताबिक बच्चा गोद लेने वाली मांओं को भी कम से कम 16 हफ्तों की छुट्टियों का हक दिया जा रहा है.यही नहीं इस कानून के तहत 50 या 50 से अधिक कर्मचारियों वाली संस्थाओं में नवजात शिशुओं की देख रेख के लिए क्रेच भी बनवाना अनिवार्य होगा.
श्रम मंत्रालय के कानूनों के मुताबिक सरकार बिल में तो कानून का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान करेगी ही साथ ही नये नियम अलग से बनाये जाएंगे ताकि जो भी संस्था कानून का ना तो उल्लंघन कर सके और ना ही महिलाओं को इसकी आड़ में नौकरी मिलने में दिक्कत हो. मोदी सरकार इससे पहले 12 साल तक बच्चों से किसी भी तरह के काम कराने पर नया कानून लाकर पहले ही पूरी तरह रोक लगा चुकी है.
Digital Desk: Manish Patwa
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