इस बार साम्प्रदायिक और बाकी ताकतें मुझे हराने में जुटी हैं। बीजेपी के लोकल कैंडिडेंट के माध्यम से मेरा चुनाव बर्बाद करना चाहते हैं। इस चुनाव मैं पहली बार 24 जनवरी को नॉमिनेशन से लेकर 19 फरवरी को वोटिंग होने तक 28 दिन तक अपने विधानसभा क्षेत्र जसवंतनगर में ही डटा रहा। कहीं नहीं गया। इस सीट से नेताजी (मुलायम सिंह) विधायक भी रहे। इटावा से सांसद भी। वो कई दिन से यहां के लोगों से नहीं मिले थे। इसलिए मैंने सोचा कि रैली भी हो जाएगी और हम अपने पुराने लोगों से भी मिल लेंगे।” हुई बदनामी के सवालों पर शिवपाल बचते हुए दिखाई दिए
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