56 साल के रावत 1979 में संघ में शामिल हुए थे और 2 साल में ही वह प्रचारक बन गए। उस वक्त उनकी उम्र महज 21 साल थी। एक प्रचारक अपने परिवार के साथ नहीं रहता और अपना जीवन संघ के कार्यों में समर्पित करता है।त्रिवेंद्र सिंह रावत 1997-2002 के बीच उत्तराखंड के अर्गनाइजिंग सेक्रेटरी रहे। पौड़ी गढ़वास में जन्मे रावत ने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में की। उन्होंने राज्य के आंदोलन में भी भाग लिया, जिस कारण वह जेल भी गए। उन्होंने देहरादून के डोइवाला से अपने चारों विधानसभा चुनाव लड़े हैं और उनके दोस्त उन्हें ‘पक्का पहाड़ी’बुलाते हैं।
1985 में रावत को देहरादून महानगर का प्रचारक नियुक्त किया गया। वर्ष 1993 में संघ की ओर से उन्हें भारतीय जनता पार्टी में संगठन मंत्री का दायित्व दिया गया। राज्य आंदोलन में भी त्रिवेंद्र की अहम भूमिका रही। वह कई बार गिरफ्तार हुए और जेल भी गए। वर्ष 1997 से 2002 तक भाजपा में उन्हें प्रदेश संगठन मंत्री बनाया गया। इस दौरान भाजपा ने विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की। वर्ष 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में डोईवाला से चुनाव जीता और विधायक बने। 2007 में डोईवाला से दोबार रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की और भाजपा सरकार में कृषि मंत्री बने।
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