उन्होंने कहा भारत की परंपरा ऐसी है जिसने जाति भेद को समाप्त किया। क्षेत्रीयता की दीवारों को तोड़ा। पंथ और जाति के भेदों को तोड़कर सामाजिक समरसता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विशिष्ट ज्ञान- अध्यात्म के नाम पर है। विश्वविजेता बनने का सपना देखने वाले सिकन्दर को सिन्धु तट पर बैठे एक सन्यासी ने बता दिया था कि इस विश्व का विधाता तो है विजेता नहीं।
सीएम ने कहा कि भक्ति आंदोलन के प्रणेता तुलसीदास जी ने अकबर को कभी राजा नहीं माना। अकबर को उदारवादी माना जाता था। उसने सोचा कि तुलसीदास को जबरन दबाया तो विरोध होगा। सो उसने उन्हें नवरत्नों में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा। अकबर के दूत ने जब उनसे कहा कि राजा ने बुलाया है तो तुलसीदास जी ने कहा कि वह सिर्फ राम को राजा मानते हैं।
इसके पहले कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और उत्तर प्रदेश भाजपा के मुख्य वक्ता हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से यूपी का रसायन बदल रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने लोगों का ऐसा उत्साह कभी नहीं देखा जैसा गोरखपुर में देखने को मिल रहा है। उन्होंने बाबा गम्भीरनाथ की योग पद्धति गुरु गोरक्षनाथ की परंपरा और गोरक्षपीठ के सामाजिक सरोकारों पर व्याख्यान दिया।
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