चैंपियंस ट्रॉफी: श्रीलंका ने भारत को 7 विकेट से हराया, शिखर धवन का शतक
(DELHI, DELHI) चैम्पियंस ट्रॉफी में गुरुवार को श्रीलंका के खिलाफ टीम इंडिया को सात विकेट से हार का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 321 रन बनाए, लेकिन भारत इस टारगेट को डिफेंड नहीं कर पाया। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने मैच के बाद कहा कि हमारी गेंदबाजी खराब नहीं थी, तो फिर क्या कारण रहे कि टीम इंडिया इस मैच को बचा नहीं सका। भारत ने शिखर धवन के 125 रन और रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धौनी की हाफसेंचुरी के दम पर छह विकेट पर 321 रन बनाए। जवाब में श्रीलंकाई टीम ने 48.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। श्रीलंका की ओर से सलामी बल्लेबाज निरोशन डिकवेला को छोड़कर बाकी सभी बल्लेबाजों ने जीत में अहम भूमिका निभाई। भारत के हार्दिक पांड्या (7 ओवर में 51 रन) और रविंद्र जडेजा (6 ओवर में 52 रन) बहुत महंगे साबित हुए। पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त गेंदबाजी करने वाली टीम इंडिया के गेंदबाज इस मैच में ओवरकॉन्फिडेंट नजर आए। गेंदबाजों में अनुशासन की कमी साफ नजर आई। फ्लैट पिच पर गेंदबाजों को मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन अगर अनुशासन से गेंदबाजी की जाती तो श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर अंकुश लगाया जा सकता था। फील्डिंग एक बार फिर विराट कोहली का सिरदर्द बना रहा। रनों पर अंकुश लगाने के लिए फील्डरों का अहम रोल होता है, लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे। धनुष्का गुणतिलका ने 72 गेंद में 76 जबकि कुशल मेंडिस ने 93 गेंद में 89 रन बनाए। दोनों ने 159 रन की साझेदारी करके टीम को अच्छी शुरुआत दी। 11 रन पर पहला विकेट गिरने के बाद इन दोनों की साझेदारी मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई। इन दोनों ने रनरेट बनाए रखा और टीम इंडिया के गेंदबाजों का बिना किसी दबाव के सामना किया। इसके बाद कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने 44 गेंद में नॉबाद 52, असेला गुणरत्ने ने 21 गेंद में नॉटआउट 34 और कुशल परेरा ने 47 (रिटायर्ड हर्ट) रन बनाए।

भारत के नियमित गेंदबाज जब फेल होते दिखे, तो कप्तान विराट कोहली ने खुद गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाई। ऐसे में ये समझ से परे है कि युवी को गेंद क्यों नहीं दी गई। जब विराट और केदार जाधव गेंदबाजी कर सकते हैं, तो विकेट की तलाश में युवी को भी एक ओवर दिया जाना चाहिए था। हो सकता है युवी श्रीलंकाई बल्लेबाजों को परेशान कर पाने में सफल होते।टीम इंडिया ने इस मैच में प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया था। उमेश यादव की जगह इस मैच में मोहम्मद शमी को मौका दिया जा सकता था। इसके अलावा केदार जाधव की जगह आर अश्विन को भी टीम में शामिल करना एक सूझबूझ भरा फैसला हो सकता था। लंदन के द ओवल में मैच खेला जा रहा था। विकेट बिल्कुल फ्लैट था, ऐसे में इस मैदान पर दूसरी पारी में खेलने वाली टीम फायदे में रहती। दोनों पारियों में विकेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था और रनों का अंबार लगना भी तय था। ऐसे में जो भी टीम दूसरी पारी में खेलती उसे लक्ष्य मिलने का एडवांटेज मिलता ही। ऐसे में 321 रनों का लक्ष्य भी हासिल करना मुश्किल नहीं होता।

Author: JAN TV Editorial Team

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