राष्ट्रपति चुनाव 2017: एनडीए उम्मीदवार कोविंद को पुराने मसलों पर घेरने की तैयारी मे विपक्ष
(DELHI, DELHI) राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुकाबले मीरा कुमार को मैदान में उतारने के बाद अब विपक्ष कोविंद के खिलाफ जोर शोर से प्रचार करने की भी तैयारी कर रहा है। इस प्रचार में कोविंद को यह कहते हुए निशाना बनाया जा सकता है कि आरक्षण को लेकर उनकी प्रतिबद्धता संदिग्ध है। विपक्ष यह आरोप भी लगाएगा कि बीजेपी के करीबी माने जाने वाले भगवा संगठनों ने पहले दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन के चयन पर सवाल खड़े किए थे। बताया जा रहा है कि इस सिलसिले में विपक्षी दलों के नेताओं के बीच एक पर्चा भी बांटा गया है, जिसमें इन तमाम बातों को विस्तार से बताया गया है। विपक्ष का कहना है कि जब केआर नारायणन देश के राष्ट्रपति बनने वाले थे, तब विश्व हिंदू परिषद ने उनकी उम्मीदवारी को हिंदुत्व के खिलाफ साजिश करार दिया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि उस वक्त बीजेपी और आरएसएस ने इस बात का विरोध करने के बजाय चुप्पी साध ली थी।

इसके अलावा विपक्ष इस बात पर भी सवाल खड़े करेगा कि किस तरह बीजेपी ने कोविंद की जाति को हाइलाइट कर के दलितों को लुभाने की कोशिश की है। विपक्ष के प्लान में ऐसे गैर-एनडीए दलों पर निशाना साधना भी शामिल होगा, जिन्होंने कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके लिए विपक्ष कोविंद को ऐसे व्यक्ति की के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा जिसकी एससी, एसटी और ओबीसी जातियों को नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण पर राय संदिग्ध है। विपक्ष अपने इन हमलों के लिए कोविंद द्वारा राज्यसभा में दिए गए भाषणों को आधार बनाएगा। 17 दिसंबर, 2004 में दिए गए एक भाषण में कोविंद ने कहा था कि 50 से ज्यादा सालों से जारी आरक्षण की वजह से एससी-एसटी-ओबीसी और सवर्ण जातियों के बीच कटुता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा था कि 'दोनों ही न्यायसंगत' है। कोविंद ने यह भी कहा था कि एससी, एसटी वर्ग को इस बात की चिंता है कि सरकारी नौकरियों में उनका 22.5% हिस्सा दशकों से नहीं भरा जा सका है, क्योंकि आरक्षण को लागू करने का काम गैर-आरक्षित जातियों के पास है।

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