विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने तीनों के इस्तीफे की पुष्टि की है। यादव ने कहा कि विधान परिषद के तीनों सदस्य अलग-अलग आये थे और इस्तीफा देकर चले गये। नवाब ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि उनका सपा में दम घुट रहा था। सपा पार्टी न रहकर अब अखाड़ा बन गयी है। उन्होंने बाप-बेटे (मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव) को मिलाने की काफी कोशिश की, लेकिन दोनो एक- दूसरे से सुलह करने को तैयार ही नहीं हैं। कार्यकर्ता वहां घुटन महसूस कर रहे हैं।
विधान परिषद के सभापति रमेश यादव को सुबह ही सौंपे इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि सपा में अब उनकी रहने की इच्छा नहीं है इसलिय वह परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं। श्री नवाब ने हाल ही में राम मंदिर निमार्ण के पक्ष में बयान दिया था। उन्होंने कहा था, 'राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में नहीं होगा तो कहां होगा। मंदिर निमार्ण तो होना ही चाहिये।'करीब 40 वर्षों से सार्वजनिक जीवन व्यतीत कर रहे श्री नवाब को मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है।
आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ पहुंचे हुए हैं। बीजेपी प्रेजिडेंट अमित शाह ने लखनऊ आते ही सपा को बड़ा झटका दिया है। यह शाह का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इस घटनाक्रम को कुछ मंत्रियो को एमएलसी बनाने का रास्ता माना जा रहा है। रिक्त सीट पर बीजेपी नेता उपचुनाव लड़ सकते हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दो डिप्टी सीएम दिनेश चंद्र शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य, मोहसिन रजा और स्वतंत्र देव सिंह अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। इसलिए इन्हें मंत्रिमंडल का सदस्य बने रहने के लिए किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है।
सपा मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने एमएलसी के पार्टी छोड़ने पर मीडिया से कहा कि एमएलसी और एमएलए को लालच देकर बीजेपी तोड़ रही है। बीजेपी जनता के बीच जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। बिहार में इन लोगो ने राजनीतिक भ्रष्टाचार किया और अब गुजरात में कांग्रेस को तोड़ने में लगे हैं।
अखिलेश ने कहा कि एमएलसी तोड़ना राजनीतिक भ्रष्टाचार है। बुक्काल नवाब अगर क़ैद नही हुए होंगे तब मैं उनसे पूछूँगा की क्या कारण है। अगर मायावती चुनाव लड़ती हैं तो मैं केवल इतना कहूँगा की समाजवादियो के सबसे अच्छे सम्बंध है। परिस्थिति के अनुसार राजनीति में किसकी कब मदद करनी पड़े , उसके लिए तैयार रहना चाहिए।
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