इन अफसरों ने अपनी याचिका में बताया है कि सेना और केंद्र सरकार के इस कदम (पदोन्नति में भेदभाव) से याचिकाकर्ताओं और अन्य अफसरों के साथ बड़ा अन्याय हुआ है। याचिका में बताया गया है कि इससे अफसरों का मनोबल गिरता है जिसका असर देश की रक्षा की भावना पर पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने अपील में कहा है कि अगर सेना उन्हें समान पदोन्नति नहीं देती है तो वो इन अफसरों को सैन्य मोर्चों पर भी न तैनात करे।
अधिकारियों के इस कदम से सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में आग्रह किया है कि अगर उनके साथ पदोन्नती में ऐसी ही भेदभाव हुआ और उन्हें उनका हक नहीं मिला, तो उन्हें ऑपरेशनल एरिया और युद्ध क्षेत्र में तैनात न किया जाए।
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