डी एम मुले ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। प्रथम प्रवासी सांसद सम्मेलन में 23 देशों के भारतीय मूल के 140 से अधिक सांसद और मेयर के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केंद्र में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों से संपर्क के जरिए इन देशों से संबंध मजबूत बनाना है।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने की दिशा में सरकार की कोशिश को आगे बढाने के लिए भी एक मंच मुहैया करेगा? डी एम मुले ने हाल ही में संवाददाताओं से कहा था कि हम हिन्दी को काफी प्राथमिकता देते हैं और जब फिजी और मॉरीशस जैसे देशों के प्रतिनिधि आएंगे और हिन्दी में बोलेंगे तब खुद ही इसे बल मिलेगा। इस सम्मेन में हिस्सा लेने के लिए 30 देशों को आमंत्रण भेजा गया था और 23 ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। इन देशों से कुल 141 जन प्रतिनिधियों के भाग लेने का कार्यक्रम है। ब्रिटेन कनाडा फिजी केन्या मॉरीशस न्यूजीलैंड श्रीलंका और अन्य देशों से 124 सांसदों के इसमें भाग लेने का कार्यक्रम है।
मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सम्मेलन में अमेरिका मलेशिया स्विटजरलैंड गुयाना त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित अन्य देशों से 17 मेयर के भी यहां दिन भर के कार्यक्रम में शरीक होने का कार्यक्रम है। अमेरिका में अभी सीनेट का सत्र चल रहा है ऐसे में वहां से प्रतिनिधि नहीं आ रहे हैं। श्रीलंका को छोड़ कर किसी अन्य दक्षेस देश को आमंत्रण नहीं भेजा गया।
सम्मेलन में दो परिचर्चा सत्र भी हैं जिसमें प्रवासी भारतीय सांसद संघर्ष से संसद तक की यात्रा और उभरता भारत प्रवासी भारतीय सांसदों की भूमिका विषय शामिल हैं। सम्मेलन के एक सत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी शामिल हो रहे हैं। इस सत्र की अध्यक्षता राज्यसभा के उपसभापति करेंगे। दूसरे सत्र में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार विशेष अतिथि होंगे जिसकी अध्यक्षता लोकसभा के उपाध्यक्ष करेंगे। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समापन सत्र में हिस्सा लेंगे।
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