पीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस साल के हमारे पहले महत्वपूर्ण अतिथि हैं। इजरायल और भारत दोनों ही देशों कभी अपना इतिहास नहीं भूले। मोदी ने कहा कि मेरे लिए यह भी बहुत खुशी की बात है कि मैं पीएम नेतन्याहू और उनकी पत्नी को अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर लेकर जाने वाला हूं।
दिल्ली के हैदराबाद हाऊस में आयोजित द्विपक्षीय बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और भारत दोनों का ही इतिहास हजारों साल पुराना है। हम अपने रिश्ते में एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं। भारत और इजरायल दोनों ही देश आंतकी हमलों के दर्द को जानते हैं। हमें याद है मुंबई आतंकी हमला याद है।
इससे पहले दौरे के दूसरे दिन बेंजामिन नेतन्याहू का राष्ट्रपति भवन में सम्मान किया गया। पीएम नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। नेतन्याहू ने इसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने इजरायली पीएम और उनकी पत्नी को राष्ट्रपति भवन में मौजूद अधिकारियों और मंत्रियों से मिलवाया। नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी को इजरायली प्रतिनिधियों से मिलवाया।
भारत इजरायल के साथ रिश्तों को स्वतंत्र रूप से देखता है लेकिन अरब देशों में रहने वाले करीब 60 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि रक्षा व सैन्य छेत्र में भारत व इजरायल के सहयोग नेतन्याहू की यात्रा से नई ऊंचाइयों को छुएगा। इजरायल भारत को कई महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तांतरण को तैयार है। उन्होंने कहा जब जब भारत को रक्षा क्षेत्र में सहयोग की जरूरत हुई है इजरायल ने कदम आगे बढ़ाकर सहयोग किया है। इजरायल भारत को रक्षा क्षेत्र में नए उपकरण देने और नई तकनीकी साझा करने को तैयार होगा। वह भारत के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट से भी जुड़ने को तैयार दिखता है।
शशांक के मुताबिक दोनों देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिए आतंकवाद पर इनका कड़ा रुख और आतंकरोधी सहयोग बढ़ाने का मसौदा वार्ता की मेज पर जरूर होगा। खासतौर पर आईएस और खुरासान की चुनौती के लिहाज से भी दोनो देशों के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान जरूरी है।
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि चीन का हमारे मुकाबले दोगुना तीन गुना ज्यादा सहयोग इजरायल के साथ विभिन्न छेत्रों में है। भारत का ध्यान इस लिहाज से भी संतुलन साधने पर होगा।
कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि इजरायल से संबंधों की मजबूती से अरब देशों से खटास नहीं आएगी। क्योंकि भारत का अरब देशों के साथ स्वतंत्र तौर पर बेहतर संबंध हैं।
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