उन्होंने आर्थिक और विदेश नीतियों के लिए सरकार पर हमले किए। उन्होंने कहा, ‘डर में जी रहे हैं पूरे देश के लोग, पर भाजपा में सबसे ज्यादा डरे हुए हैं, हम नहीं।’ उन्होंने कहा कि देश में संवाद और चर्चा ‘असभ्य, एकतरफा और खतरनाक’ हो गई है। उन्होंने दावा किया, ‘ऐसा लगता है कि भीड़ का काम न्याय देने का हो गया है।’ उन्होंने कहा कि संसद के बजट सत्र के पहले चरण में प्रभावी रूप में सिर्फ चार कामकाजी दिन होंगे। यह अभूतपूर्व है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे को उठाना उनके संगठन की शीर्ष प्राथमिकता होगी। वरिष्ठ नेता ने हालांकि दावा किया कि राष्ट्र मंच एक गैर दलीय राजनैतिक कार्रवाई समूह होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मंच किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है और राष्ट्रीय मुद्दों पर जोर देने के लिए वह कार्य करेगा। उन्होंने कहा, ‘यह कोई संगठन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन है।’
Digital Desk: Kamal
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