पीएम मोदी ने नागरिकों के लिए डीजल-पेट्रोल को सस्ता करने का कदम उठाने का आग्रह किया
(India) राजधानी दिल्ली को मानक मानते हुए देखा जाए तो इंडियन ऑयल पर मौजूद 16 अप्रैल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल में करीब 53 फीसदी हिस्सा (56.32 रुपये) तो उसका बेस प्राइस है। इसके अलावा 16 फीसदी वैट (17.13 रुपये) और 27 फीसदी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (27.90 रुपये) है। इसके अलावा बचा हुए 4 फीसदी डीलर कमीशन (3.86 रुपये) और फ्रेट (0.20 रुपये) है। यानी दिल्ली में तो राज्य से अधिक टैक्स केंद्र के पास जाता है।

पीएम मोदी ने कहा है कि सरकार को पेट्रोल-डीजल से जो रेवेन्यू आता है, उसका भी 42 फीसदी राज्यों को ही चला जाता है। यह सच भी है, लेकिन इसमें एक बड़ा ट्विस्ट है। सरकार को पेट्रोल पर कुल 27.90 रुपये का उत्पाद शुल्क मिलता है। इसमें बेसिक एक्साइज ड्यूटी 1.40 रुपये और स्पेशल एडिशनल ड्यूटी 11 रुपये होती है। सिर्फ इसी से हुई कमाई वाले हिस्से में से 42 फीसदी राज्यों को जाता है। यानी कुल 12.40 रुपये का 42 फीसदी पैसा ही केंद्र से राज्यों को जाता है, जो 5.20 रुपये बनता है। इसके अलावा 2.5 रुपये एग्रिकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगता है और 13 रुपये रोड सेस सकता है। सेस के जरिए मोदी सरकार को जो पैसा जाता है, उस पर सिर्फ केंद्र सरकार का ही हक होता है। हालांकि, पीएम मोदी ने रेवेन्यू शब्द का इस्तेमाल किया था, जिससे ऐसा लग रहा है कि पूरे 27.90 रुपये का 42 फीसदी यानी करीब 11.70 रुपये राज्यों को जाता है, जबकि ऐसा नहीं है।

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