इफ्तार पार्टी के बाद बदलने लगे हैं नीतीश कुमार? समझें क्या है उनका रिवर्स प्रेशर गेम
(India) बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सबकुछ ठीक नहीं है? पिछले कुछ दिनों से बिहार में हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है। जिस तरह दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं, उससे अटकलों को हवा मिल रही है। रमजान में दो बार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और आरजेडी नेताओं के साथ दो बार इफ्तार पार्टी कर चुके नीतीश कुमार की पार्टी ने यूसीसी से लेकर लाउडस्पीकर विवाद तक पर भाजपा को आंखें दिखाई हैं। आइए आपको बताते हैं इस प्रेशर पॉलिटिक्स की क्या वजहें हैं और अब तक क्या-क्या हुआ है।

नीतीश कुमार को राष्ट्रपति बनाए जाने की अटकलों से शुरुआत
दरअसल, खटपट की शुरुआत कुछ दिन पहले उस समय हुई जब अचानक मीडिया में खबरें आईं कि राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार विपक्ष का उम्मीदवार बन सकते हैं। इसके बाद तो जैसे बयानबाजी की बाढ़ आ गई। खुद नीतीश कुमार ने इन खबरों का खंडन किया लेकिन यह कहा जाने लगा कि बिहार में मुख्यमंत्री बदला जा सकता है। यूपी चुनाव के दौरान भाजपा से दुश्मनी मोल लेने वाले विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को झटका देते हुए बीजेपी ने उनके तीनों विधायकों को अपनी पार्टी में मिला लिया। इससे भाजपा विधानसभा में सबसे अधिक विधायकों की पार्टी बन गई। इसके बाद कयास लगने लगे कि बीजेपी जल्द ही नीतीश की जगह अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग रखेगी। नीतीश रहेंगे या जाएंगे इस सवाल पर दोनों दलों के बीच जमकर खींचतान हुई।

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