जताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट कम्युनिटी को उनके योगदान की कमी खलेगी।बीसीसीआई ने अपने बयान में कहा,‘‘अंशुमन गायकवाड़ का निधन भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान है। खेल के लिया उनके कमिटमेंट और प्यार की कोई मिसाल नहीं है। वे सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि कई लोगों के लिए गुरु और दोस्त थे। क्रिकेट कम्युनिटी उन्हें बहुत याद करेगी और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।’’
बीसीसीआई ने कहा कि गायकवाड़ ने बिना किसी हिचकिचाहट के दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों का सामना किया।बीसीसीआई ने कहा, "अपनी बेहतरीन तकनीक और बुलंद हौसले के लिए जाने जाने वाले गायकवाड़ ने तेज गेंदबाजी के कुछ बेहतरीन स्पैल का सामना करते हुए मजबूत इरादे दिखाए, वो भी ऐसे वक्त में जब प्रोटेक्टिव गियर हुत कम थे।"अंशुमन गायकवाड़ को 1976 में जमैका में खेली गई 81 रनों की पारी के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। वहां उन्होंने मुश्किल पिच पर खतरनाक गेंदबाजी का डटकर सामना किया। इसके अलावा 1983 में जालंधर में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 201 रनों की शानदार पारी खेली थी। उन्होंने 671 मिनट तक बल्लेबाजी की थी। अंशुमन गायकवाड़ का घरेलू रिकॉर्ड भी शानदार रहा। उन्होंने 200 से ज्यादा फर्स्ट क्लास मैचों में 34 शतकों और 47 अर्द्धशतकों समेत 12,000 से ज्यादा रन बनाए। बीसीसीआई ने अपने शोक संदेश में कहा, "खेल के लिए उनकी रणनैतिक सूझबूझ और गहरी समझ ने उन्हें खिलाड़ियों और साथियों से काफी सम्मान दिलाया। चुनौतियों को स्वीकार करने में कभी संकोच नहीं करने वाले, उन्होंने अलग-अलग रोल निभाए और भारतीय क्रिकेट की सेवा करने के हर मौके का फायदा उठाया।"बीसीसीआई ने हाल ही में गायकवाड़ के इलाज खर्च के लिए एक करोड़ रुपये जारी किए थे। भारत वापस लाए जाने से पहले लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
Author: JAN TV Editorial Team
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