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बसपा में सभी पदों से हटाए जाने के एक दिन बाद आकाश आनंद ने सोमवार को कहा कि वह पार्टी प्रमुख मायावती के हर फैसले का सम्मान करते हैं और उसे पत्थर की लकीर मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का उन पर भावनात्मक असर हुआ है, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया है और उनके सामने लंबी लड़ाई है। मायावती ने रविवार को अपने भतीजे आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया और उनकी जगह उनके पिता आनंद कुमार और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने जीवनकाल में उत्तराधिकारी का नाम नहीं बताएंगी। आनंद ने सोमवार को एक्स इन हिंदी पर एक पोस्ट में कहा, "मैं मायावती जी का कैडर हूं और उनके नेतृत्व में मैंने त्याग, निष्ठा और समर्पण के अविस्मरणीय सबक सीखे हैं, ये सब मेरे लिए सिर्फ एक विचार नहीं बल्कि मेरे जीवन का उद्देश्य है। बहन जी (मायावती) का हर फैसला मेरे लिए पत्थर की लकीर है।" मैं उनके द्वारा लिए गए हर फैसले का सम्मान करता हूं और उसके साथ खड़ा हूं।'' उन्होंने कहा, ''इस फैसले ने मुझे भावुक कर दिया, लेकिन अब यह एक बड़ी चुनौती है, परीक्षा कठिन है और आगे लंबी लड़ाई है।'' खुद को बहुजन मिशन और बहुजन आंदोलन का सच्चा कार्यकर्ता बताते हुए आनंद ने कहा कि ऐसे कठिन समय में धैर्य और दृढ़ संकल्प ही व्यक्ति का सच्चा साथी होता है।'' उन्होंने कहा, ''मैं पार्टी और मिशन के लिए पूरी निष्ठा से काम करता रहूंगा और अपनी आखिरी सांस तक अपने समाज के अधिकारों के लिए लड़ता रहूंगा।'' राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ''प्रतिद्वंद्वी पार्टी के कुछ लोग सोच रहे हैं कि मेरा राजनीतिक करियर खत्म हो गया है... उन्हें समझना चाहिए कि बहुजन आंदोलन करियर नहीं, बल्कि करोड़ों दलितों, शोषितों, वंचितों और गरीबों के स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लड़ाई है।'' ''यह एक विचार है, एक आंदोलन है, जिसे दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, "लाखों आकाश आनंद इस मशाल को जलाए रखने और इसके लिए अपना सबकुछ कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार हैं।" आनंद को प्रमुख पदों से हटाते हुए मायावती ने रविवार को कहा कि पार्टी सर्वोच्च है और रिश्ते बाद में भी हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले साल आनंद को बर्खास्त कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें बहाल कर दिया और उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी नियुक्त किया। उन्होंने उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधते हुए उन पर बसपा को दो गुटों में बांटकर कमजोर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मायावती ने पिछले महीने सिद्धार्थ को गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने जीवनकाल में उत्तराधिकारी का नाम नहीं बताएंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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