टिक-टॉक के अमेरिकी कारोबार को लेकर वॉशिंगटन लगातार सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी की चिंताएँ उठाता रहा है। ट्रंप प्रशासन ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि ऐप के अमेरिकी संचालन का नियंत्रण अमेरिकी निवेशकों के पास होना चाहिए।
अमेरिका चाहता है कि टिक-टॉक का यूज़र डेटा पूरी तरह अमेरिकी सर्वरों पर सुरक्षित रहे। यह तय करना होगा कि टिक-टॉक का अनुशंसा तंत्र (recommendation algorithm) किसके नियंत्रण में रहेगा। अमेरिका की ओर से तय की गई डेडलाइन निकट है, ऐसे में इस कॉल में अंतिम दिशा स्पष्ट हो सकती है।
अगर यह समझौता सफल रहता है, तो अमेरिका-चीन संबंधों में हाल का तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है। यह सौदा डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों के लिहाज़ से भी मिसाल साबित होगा।
हालांकि चीन के लिए एल्गोरिदम और तकनीकी नियंत्रण छोड़ना आसान नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीतिक वर्ग चाहता है कि यह समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरी तरह संतुष्ट करे।
Author: JAN TV Editorial Team
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