आचार संहिता लागू होने से लेकर पहले चरण की मतदान तक ठीक एक महीने का समय है। पिछले तीन चुनावों में, पहले मतदान का आयोजन दक्षिण बिहार के मगध और शाहाबाद क्षेत्रों में होता था। इस बार, पहले चरण में उत्तर बिहार के तिरहुत, मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। जहाँ NDA मजबूत है, वहीं पहले चरण में दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, गोपालगंज, मुंगेर और नालंदा में मतदान होगा।
पहले चरण की 121 सीटों में से 70 सीटें तिरहुत और मिथिलांचल से हैं, जहाँ NDA के पास 39 सीटें हैं। मगध, अंग प्रदेश और शाहाबाद के अधिकांश जिलों में दूसरे चरण में मतदान होगा, जिसमें NDA की स्थिति मजबूत है।
तिरहुत में विधानसभा की 64 सीटें हैं, जिनमें 36 NDA और 28 महागठबंधन के पास हैं। मिथिलांचल में 46 सीटों में से 30 NDA और 15 महागठबंधन के पास हैं।
रुझानों के अनुसार, 2020 के विधानसभा चुनाव के हिसाब से पहले चरण की 121 में से 59 सीटें NDA और 61 सीटें महागठबंधन के पास हैं। दूसरे चरण में 122 में से 66 NDA और 49 महागठबंधन के पास हैं।
वरिष्ठ पत्रकार इंद्रभूषण के अनुसार, महागठबंधन के मजबूत क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। सीमांचल के इलाके सेंसिटिव माने जाते हैं, यहाँ नक्सली मूवमेंट के कारण भी सुरक्षा की जरूरत अधिक है।
मुख्य चुनाव आयुक्त रहे एसवाई कुरैशी का कहना है कि पहले से अधिक फेज में मतदान करने के कारण अब चुनाव आयोग को कोई चुनौती नहीं आएगी। उन्होंने 2010 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई थी, जो अब भी बनी हुई है।
इस बार बिहार का चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है, और परिणाम देखने के लिए सभी की नजरें 14 नवंबर पर टिकी होंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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