तेल, ड्रग्स और भू-राजनीति—क्यों वेनेजुएला को निशाना बना रहा है अमेरिका?
(India) दक्षिण अमेरिका में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। शनिवार को काराकास में धमाकों के वीडियो सामने आए, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्रवाई की बात स्वीकार की। ट्रंप प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि कार्रवाई के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने जैसे कदम उठाए गए, हालांकि इन दावों पर वेनेजुएला की ओर से कड़ा विरोध और खंडन किया गया है।
वॉशिंगटन वेनेजुएला पर ड्रग तस्करी, अवैध प्रवासन और संगठित अपराध को संरक्षण देने जैसे आरोप लगाकर अपनी सख्ती को सही ठहराता रहा है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि मादुरो सरकार के दौर में फेंटेनाइल और कोकीन की तस्करी बढ़ी, जिसे अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बताया। इसी आधार पर कैरिबियाई सागर में वेनेजुएला की नावों को निशाना बनाने, तेल टैंकर जब्त करने और बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती जैसे कदम उठाए गए। दूसरी ओर, काराकास इन आरोपों को बेबुनियाद बताता है और कहता है कि यह सब सत्ता परिवर्तन की कोशिश का हिस्सा है।
असल में दोनों देशों के टकराव की जड़ वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति रही है। 1999 में ह्यूगो शावेज द्वारा तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद से रिश्ते बिगड़ते चले गए। शावेज और बाद में मादुरो सरकार ने रूस, चीन, ईरान और क्यूबा से नजदीकियां बढ़ाईं, जिससे अमेरिका की चिंता बढ़ी। अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह टकराव और आक्रामक हो गया है, जिसे विशेषज्ञ क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती मान रहे हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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