वेनेजुएला संकट की पूरी कहानी: तेल की ताकत से आर्थिक तबाही तक का सफर
(India) वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है। 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने न केवल राजनीतिक भूचाल पैदा किया, बल्कि उस आर्थिक पतन की कहानी को भी फिर से सामने ला दिया, जिसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में गिना जाता है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार होने के बावजूद, पिछले एक दशक में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था करीब 80% तक सिमट गई। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में हलचल दिखी है और निवेशक संभावित सत्ता परिवर्तन को कर्ज पुनर्गठन से जोड़कर देख रहे हैं।
कभी वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का सबसे समृद्ध देश था। 1950 से 1980 के बीच इसकी प्रति व्यक्ति आय चीन और जापान से कई गुना अधिक थी। तेल से आने वाली कमाई ने इसे ‘सऊदी वेनेजुएला’ की पहचान दिलाई। लेकिन तेल पर अत्यधिक निर्भरता, कुप्रबंधन और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की जड़ें खोखली कर दीं। ह्यूगो शावेज के दौर में तेल की ऊंची कीमतों से सामाजिक योजनाओं को बल मिला, लेकिन उत्पादन क्षमता और अन्य क्षेत्रों में निवेश नहीं हुआ। 2014 में तेल कीमतें गिरते ही पूरा मॉडल ढह गया।
निकोलस मादुरो के कार्यकाल में हालात और बिगड़े। अमेरिकी प्रतिबंधों, राजनीतिक अलगाव और बेतहाशा नोट छापने से देश महंगाई के दलदल में फंस गया। 2018 में मुद्रास्फीति लाख प्रतिशत के पार पहुंची और करोड़ों लोग देश छोड़ने को मजबूर हुए। भुखमरी, बेरोजगारी और पलायन ने वेनेजुएला की सामाजिक संरचना तोड़ दी। अब सवाल यह है कि मादुरो के बाद क्या हालात बदलेंगे या तेल, कर्ज और विदेशी प्रभावों की जटिलता वेनेजुएला की राह को और मुश्किल बनाएगी।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।