NEET पेपर लीक रोकने के लिए बदलेगा परीक्षा का तरीका? नंदन नीलेकणि ने दिए अहम सुझाव
(India) मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में पेपर लीक की आशंका को कम करने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का प्रस्ताव सामने आया है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक और परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर टास्क फोर्स के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने सुझाव दिया है कि प्रश्नपत्र को परीक्षा से काफी पहले तैयार करने के बजाय अंतिम समय में तैयार किया जाए। इसके लिए तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है।

क्यों बदलना चाहते हैं प्रश्नपत्र तैयार करने का तरीका?

पारंपरिक व्यवस्था में प्रश्नपत्र परीक्षा से काफी पहले तैयार किया जाता है। इसके बाद उसकी छपाई, पैकिंग, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया होती है। इस लंबी प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक होने का जोखिम बना रहता है।

नीलेकणि का मानना है कि यदि परीक्षा के लिए एक निश्चित प्रश्नपत्र पहले से तैयार रखने के बजाय अंतिम समय में प्रश्नों का चयन किया जाए, तो उसे पहले से हासिल करके बेचने का आर्थिक प्रलोभन कम हो सकता है।

क्या हैं प्रमुख सुझाव?

1. विशाल प्रश्न बैंक: बड़ी संख्या में मानक और विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों का डिजिटल संग्रह बनाया जाए।

2. अंतिम समय में पेपर तैयार करना: प्रश्न बैंक से परीक्षा के लिए प्रश्नों का चयन अंतिम समय में किया जाए।

3. AI और तकनीक का इस्तेमाल: प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए AI या अन्य डिजिटल तकनीकों की मदद ली जा सकती है।

4. कंप्यूटर आधारित परीक्षा: पेन-पेपर और OMR आधारित व्यवस्था के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का दायरा बढ़ाया जाए।

5. परीक्षा केंद्रों का विस्तार: अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को कंप्यूटर पर परीक्षा देने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाया जाए।

6. सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था: प्रश्नपत्र को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत सर्वर और साइबर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होगी।

7. तकनीकी सुविधाओं को मजबूत करना: कंप्यूटर, इंटरनेट और बिजली की निर्बाध आपूर्ति जैसी सुविधाओं पर ध्यान देना होगा, ताकि परीक्षा के दौरान तकनीकी समस्याएं न आएं।

छात्रों को क्या फायदा हो सकता है?

इस व्यवस्था से प्रश्नपत्र पहले से लीक होने की आशंका कम हो सकती है और परीक्षा की निष्पक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में समानता बनाए रखना, डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त कंप्यूटर सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौतियां होंगी।

यदि सर्वर या इंटरनेट में खराबी आती है, तो परीक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले तकनीकी तैयारियों और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी होगा।

नंदन नीलेकणि ने परीक्षा में पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रस्ताव दिए हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।

Author: JAN TV Editorial Team

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