(DELHI, India)
पिछले सप्ताह संसद को सूचित किया गया कि कई निजी संस्थान खुले हैं, लेकिन संकाय, खराब बुनियादी ढांचा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चिंता का सबब बनी हुई है। इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने एक लिखित जवाब में कहा कि पिछले तीन साल के दौरान एआईसीटीई ने 242 निजी संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया उन्होंने बताया कि छात्रों का शहरी केंद्रों की ओर रूख करने से ग्रामीण इलाके में ऐसे संस्थानों की बेहद कम मांग है। कुछ इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की कम मांग और सीटों को भरने तथा अच्छे प्राध्यापकों को जोड़ने में दिक्कत बंद होने की वजहें है। 2013-14 के दौरान 115 संस्थान बंद हुए, जबकि 2012-13 में 96 को ताला लगाने का आदेश दिया गया। 52 संस्थानों के साथ इस सूची में आंध्रप्रदेश शीर्ष पर है जिन्हें 2012-13 में बंद करने के लिए कहा गया। 2013-14 में ऐसे संस्थानों की संख्या 53 रही। महाराष्ट्र का स्थान दूसरा रहा जहां 28 संस्थानों को बंद करने के लिए कहा गया। मंत्रालय के मुताबिक, अभी देश में 184 निजी संस्थान चल रहे हैं। मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और ऑल इंडिया कौंसिल फोर टैक्निकल एडुकेशन (एआईसीटीई) विशेषज्ञ कमेटियों ने इनमें से 85 का जायजा लिया और बुनियादी ढांचा और योग्य संकाय सदस्यों की कमी का उल्लेख किया।
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