कहां है कमी एग्जाम के लिए पढ़ते हुए आपको इस बात का अंदाजा हो जाता है कि आप किस सेक्शन में कमजोर हैं या किस सेक्शन में सवाल समझने में आपको देर लगती है। इस कमी का पता लगने पर आपको सेक्शन की तैयारी बाकी सेक्शन्स से अलग करनी है। इससे उसे अलग अटेंशन भी मिलेगी और बाकी सेक्शन्स का नुकसान नहीं होगा।
करते रहें चेक
जिस भी सेक्शन को बाकी तैयारी से अलग समय दे रहे हैं, उसमें अपनी प्रोग्रेस चेक करते रहें। इसके सवालों को हल करने में लग रहे समय का रिकॉर्ड रखने के लिए टाइम सेट करके सवाल हल करें। कमजोर सेक्शन की तैयारी में दूसरे लोगों से मदद लें।
दीजिए मॉक टेस्ट
सिर्फ सिलेबस पढ़कर या एग्जाम स्कीम समझ लेने भर से परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। खुद को एग्जाम मोड में लाने के लिए मॉक टेस्ट पेपर दें। इससे आपको आपकी तैयारी का एक अंदाजा हो जाता है और समय प्रबंधन, किसी सेक्शन में उलझ जाने जैसी विभिन्न समस्याओं का पता भी चल जाता है। इन टेस्ट पेपर्स का इस्तेमाल आपको एग्जाम वाले दिन के लिए तैयार करने के लिए है इसलिए इसे उतना समय दें, जितना एग्जाम वाले दिन देना है।
क्या है ताकत
जिस तरह से कोई सेक्शन आपकी कमजोरी है तो कोई सेक्शन आपकी ताकत भी होगा। आपको करना यह है कि एग्जाम में सबसे पहले इसी सेक्शन से शुरूआत करनी है। अपनी कमांड वाले सेक्शन को आसानी से हल करेंगे तो बाकी पेपर के लिए उत्साह भी बढ़ेगा। यह जरूर ध्यान रखें कि सारा समय इसी सेक्शन पर न लगा दें। अगर आप शुरूआत अच्छी तरह से करेंगे तो बाद के सेक्शन्स में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
सबको दें समय
एग्जाम के टाइम मैनेजमेंट को प्लान करने के लिए सबसे पहले यह देखें कि किस सेक्शन के लिए कितना समय है? उसपर उससे ज्यादा समय न लगाएं। अक्सर ऎसा होता है कि हर सेक्शन में न्यूनतम कुछ अंक हासिल करने जरूरी होते हैं। अब आप किसी पसंदीदा या किसी मुश्किल सेक्शन में उलझे रहे तो ऎसा असंभव होगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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