(Amber, Jaipur)
यहां कांग्रेस भी पूरी मशक्कत कर बोर्ड बनाने की कवायद में लग गई है।ताकि कम से कम एक निगम का बोर्ड तो उसके खाते में रहे। प्रदेश की 46 निकायों में 22 नवंबर को हुए चुनाव में से ज्यादातर में या तो भाजपा जीत गई है या आगे चल रही है। उपचुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह भले ही थी, लेकिन भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंतरिक लहर ने कांग्रेस के सारे सपने तोड़ दिए हैं। कांग्रेस के लिए अपनी स्थिति में सुधार लाने का यह बड़ा मौका था, लेकिन उसका फायदा कांग्रेस नहीं उठा सकी। जयपुर में जिस तरह के परिणाम आए हैं, उसकी अपेक्षा को खुद को भी नहीं थी। कांग्रेस ने तो बाड़ेबंदी इस तरह से करने की कोशिश की कि कुछ सीटों का अंतर रहा तो वह बोर्ड बनाने की स्थिति में आ जाए, लेकिन परिणामों से स्पष्ट है कि वह दूर-दूर तक फटक भी नहीं पाई। उदयपुर में भाजपा पहले से ही आश्वस्त थी। मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने तो स्पष्ट कहा ही था कि वह बोर्ड बनाएंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि वोट उसी को दें जो अच्छा प्रत्याशी हो, चाहे व कांग्रेस का ही क्यों नहीं हो। इस तरह के भाषणों से सब मानकर चल रहे थे कि कटारिया पूरी तरह आश्वस्त हैं। वही हुआ भी। जोधपुर में कांग्रेस के लिए अप्रत्याशित परिणाम रहे हैं। यहां तीन बार से लगातार कांग्रेस का बोर्ड बन रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा यहां दांव पर थी और कई दिनों से वे वहां टिके हुए थे। भरतपुर में निर्दलीय प्रत्याशियों के ही जीतने की संभावना जताई जा रही थी, वैसा हुआ भी। हां भाजपा कांग्रेस से 7 सीटें आगे निकल गई, ऐसे में भाजपा पूरी कोशिश करेगी कि उसका बोर्ड बन जाए। इस निगम में जोड़ तोड़ की राजनीति जोरों पर रह सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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