नाबालिगों की रिहाई का फैसला अब नए कानून से
(India)

अपराध को अंजाम देने वाले नाबालिगों को विशेष बाल सुधार गृह में रखे जाने की अधिकतम समय पूरी होने के बाद रिहा किए जाते समय उसमें सुधार हुआ है या नहीं, इस मुद्दे का समाधान बाल न्याय (संरक्षण एवं देखरेख) अधिनियम 2015 में किया गया है। सरकार ने जानकारी देते हुए हाईकोर्ट को बताया है कि नये कानून 15 जनवरी, 2016 से प्रभावी हो गया है। चीफ जस्टिस जी. रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की पीठ ने के समक्ष केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ-साथ इस मसले को लेकर याचिका दाखिल करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पीठ को यह जानकारी दी। स्वामी ने 16 दिसंबर, 2012 के वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म व हत्याकांड के दोषी नाबालिग की रिहाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर पिछले साल दाखिल जनहित याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कहा था कि नाबालिग में सुधार नहीं हुआ है, ऐसे में उसकी रिहाई पर रोक लगाई जाए। भाजपा नेता ने याचिका में कहा था कि मौजूदा बाल न्याय (संरक्षण एवं देखरेख) अधिनियम 2000 में कुछ खामिया है। इस मामले में सरकार और याचिकाकर्ता को सुनने के बाद पीठ ने कहा है कि बाल न्याय (संरक्षण एवं देखभाल)अधिनियम 2000 की जगह नया कानून आ गया है।

Author: JAN TV Editorial Team

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