पुलिस ने 12 दिसंबर, 2010 को ही आरोपी राजेश गुलाटी को गिरफ्तार कर लिया था, तब से वह जेल में बंद है। इस हत्याकांड में करीब सात साल के ट्रायल के बाद गुरुवार को पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने राजेश गुलाटी को पत्नी अनुपमा की हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी माना और अदालत ने आज दोषी के खिलाफ फैसला सुनाया।
17 अक्तूबर 2010 को आपसी विवाद में की थी पत्नी की हत्या
12 दिसंबर 2010 को अनुपमा के भाई के देहरादून पहुंचने के बाद हुआ हत्या का खुलासा
31 अगस्त 2017 को देहरादून की जिला अदालत ने माना दोषी
01 सितंबर को कोर्ट में पहले वकीलों ने सजा पर दलीलें दी, फिर कोर्ट ने राजेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
लंबे समय तक बहन से संपर्क नहीं होने पर 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई सुजान कुमार प्रधान दून पहुंचा। यहां उसे अपार्टमेंट राजेश गुलाटी, उसके जुड़वा बच्चे सिद्धांत और सोनाक्षी मिले। अनुपमा को घर पर न पाकर सुजान ने बिंदाल चौकी पुलिस को इसकी सूचना दी तो सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ। 1999 में लव मैरिज पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश ने अनुपमा से 10 फरवरी 1999 को लव मैरिज की थी। शादी के बाद वह 2000 में अनुपमा को साथ लेकर अमेरिका चला गया था। वहीं उसके दो बच्चे हुए। 2008 में अमेरिका से लौटकर दोनों दिल्ली आ गए। इसके बाद राजेश परिवार के साथ दून में रह रहा था।
Author: JAN TV Editorial Team
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