चार दिसंबर-2016 को साहिबाबाद की रहने वाली किशोरी को पड़ोसन बहलाकर ले गई थी। इसके बाद नशीला पदार्थ देकर उसका अपहरण कर लिया गया था। उसका पिता मुकदमा लिखाने थाने पहुंचा तो पुलिस ने फटकारकर भगा दिया। आला अफसरों से शिकायत पर पुलिस ने बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज की। चार महीने बाद किशोरी को लुधियाना से बरामद किया गया। जब बरामद हुई तो वह गर्भवती थी। बुधवार को तेज दर्द के साथ ब्लीडिंग होने पर परिजन दोपहर पौने दो बजे पीड़िता को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि दो घंटे तक इमरजेंसी से ओपीडी के चक्कर लगवाते रहे।
पहले तो नाबालिग होने के चलते उन्हें धमकाया गया। फिर कहा गया कि गर्भवती का यहां रजिस्ट्रेशन नहीं है। अंत में किशोरी को भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित पिता ने हंगामा किया तो सीएमएस डॉ. दीपा त्यागी मौके पर पहुंचीं और करीब चार बजे पीड़िता को भर्ती कराया। सीएमएस दीपा त्यागी का कहना है कि जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। अगर परिजन नवजात शिशु को नहीं अपनाते हैं तो नियमानुसार न्यायालय को सूचित किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चार महीने बाद जब किशोरी बरामद हुई तो वह गर्भवती थी, लेकिन पुलिस ने मामूली धाराओं में दर्ज मुकदमे में दुष्कर्म की धारा जोड़ना भी मुनासिब नहीं समझा। पिता का आरोप था कि लड़की से दो लोगों ने दुष्कर्म किया था।पुलिस ने लड़की को 48 घंटे तक अपनी हिरासत में रखकर उससे बयान लिए कि वह खुद ही गई थी और आरोपियों में से एक से उसने शादी कर ली थी। पीड़िता पिता का कहना है कि नाबालिग अपनी मर्जी से शादी नहीं कर सकती, जिसको लेकर तहरीर भी दी, लेकिन पुलिस ने न तो लड़की का मेडिकल कराया गया और न ही दुष्कर्म की रिपोर्ट लिखी गई।
अपहरण के समय पीड़िता 15 साल की भी नहीं हुई थी और वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। पिता ने बताया कि लड़की जब बरामद हुई तो वह गर्भवती हो चुकी थी। इसके चलते वह एक भी दिन स्कूल नहीं जा पाई।
Author: JAN TV Editorial Team
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