एमिकस क्यूरी ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह फरवरी 2016 में सोनीपत के मुरथल में हुए गैंगरेप मामलों की पड़ताल केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दे। सुनवाई के दैरान अनुपम गुप्ता ने बताया है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 22 और 23 फरवरी 2016 की रात को मुरथल में नौ गैंगरेप हुए थे। इसकी जानकारी जाट आरक्षण आंदोलन की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी के सदस्य आईएएस विजय वर्धन से मिली है। विजय वर्धन को यह जानकारी कमेटी के दूसरे सदस्य हरियाणा के पूर्व डीजीपी केपी सिंह ने दी थी। एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया है कि मुरथल गैंगरेप मामले को लेकर हरियाणा सरकार का रुख नकारात्मक है और सरकार यह साबित करने में लगी हुई है कि यहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।
हरियाणा पुलिस के मुताबिक मुरथल गैंगरेप मामले में अभी तक कोई पीड़ित सामने नहीं आया है, ऐसे में जांच आगे नहीं बढ़ रही है। गुप्ता ने सुखदेव ढाबा के मालिक अमरीक सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि उसे घटना की पूरी जानकारी थी लेकिन उसने जांच कर रही एसआईटी के सदस्यों को कुछ भी नहीं बताया। अनुपम ने कहा कि राज्य सरकार मुरथल गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई से कराने का विरोध कर रही है लेकिन वह आंदोलन के दौरान सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर और मुनक नहर में की गई तोड़फोड़ की जांच सीबीआई के हवाले कर चुकी है।
एमिकस क्यूरी ने कहा जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पूरे हरियाणा में मुरथल गैंगरेप सहित 1212 एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 921 मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट तैयार की गई है जबकि 184 मामलों में रिपोर्ट तैयार ही नहीं हुई और केवल 173 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें 81 मामलों में चालान पेश किया गया है। गैंगरेप के आरोपी डेढ़ साल बाद भी पकड़ से बाहर हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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