कोर्ट ने जमानत अरजी को खारिज करते हुए अपहरण के आरोपी विधायक मनोज पारस को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि 17 नवंबर नियत है। आरोपी विधायक मनोज पारस के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थाना लक्ष्मणझूला क्षेत्र में 2013 में बिजनौर के जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि 17 जनवरी 2013 की रात को लक्ष्मणझूला के एक होटल में ठहरे जिला पंचायत सदस्यों के कमरों में जबरन घुसकर उनके साथ मारपीट व गाली-गलौज की गई।
इस मामले में वारंटी विधायक मनोज पारस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत में सरेंडर कर दिया। नामित अधिवक्ता जय दर्शन बिष्ट ने बताया कि विधायक के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। कोर्ट ने जमानत अरजी खारिज करते हुए मनोज पारस को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। इससे पूर्व यूपी सरकार के पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान सहित पूर्व सांसद नगीना यशवीर धोबी तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष नसरीन सैफी के पति रफी सैपी आदि सपा नेताओं को भी कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा था।
पौड़ी। जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के बहुचर्चित इस मामले में यूपी पुलिस के साथ उत्तराखंड पुलिस ने वारंटी विधायक मनोज पारस के आवास पर दबिश भी थी। बिजनौर जिले के लोग इस मामले को भूल गए थे लेकिन उत्तराखंड पुलिस की दबिश कार्रवाई से तब यह मामला एक बार फिर चर्चाओं में आ गया। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य पवन कुमार के बेटे रोहित कुमार ने लक्ष्मणझूला में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने भी जिला पंचायत सदस्यों के अपरहण के इस बहुचर्चित मामले में मनोज पारस की गिरफ्तारी के लिए नगीना पुलिस के साथ दबिश भी दी थी। हालांकि तब नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक के आदेश दिखाने पर दबिश देने गई पुलिस वापस हो गई।
Author: JAN TV Editorial Team
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